कुल पेज दृश्य

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

निकोला टेस्ला का सबसे असाधारण साक्षात्कार: जो ११६ वर्षों से छिपा हुआ था!

१३ फरवरी, १८९६ को लिखित एक पत्र में स्वामी विवेकानन्द वैज्ञानिक निकोला टेस्ला का उल्लेख करते हुए कहते हैं- "आज के अमेरिकन समाज के सर्वोच्च वर्ग को वेदान्त अपनी ओर काफी आकृष्ट कर रहा है। मैं अभी 'इत्सील' [Iziel] नामक नाटक एक देखने गया था। वास्तव में यह नाटक एक प्रकार से 'बुद्धदेव' का जीवन-चरित्र है, जिसका मंचन फ्रेंच पृष्ठभूमि में किया गया है। इस नाटक में दिखलाया गया है कि बटवृक्ष के नीचे बैठे हुए बुद्धदेव को इत्सील नामक एक वैश्या पाप में प्रवृत्त करना चाहती है। और जब वह बुद्धदेव की गोद में बैठ जाती है, तब उसी अवस्था में बुद्ध उसे संसार की नश्वरता-असारता का उपदेश देते हैं। अस्तु अन्त भला तो सब भला - अन्त में वह वैश्या असफल होती है।
उस नाटक में फ्रेंच ऐक्ट्रेस श्रीमती सारा बार्नहार्ड वैश्या का अभिनय कर रही हैं। उन्होंने जब मुझे दर्शक दीर्घा में बैठा देखा, तो मुझसे भेंट करने की इच्छा प्रकट की। उस बैठक में उनके अतिरिक्त एक प्रसिद्ध सिंगर श्रीमती एम० मौरेल और (पूर्वपरिचित?) विद्दयुत विज्ञान में अति निपुण श्री निकोला टेस्ला भी उपस्थित थे। श्री टेस्ला वैदान्तिक प्राण, आकाश और कल्प के सिद्धान्त सुनकर बिल्कुल मुग्ध हो गये। उनके कथनानुसार आधुनिक विज्ञान केवल इन्हीं सिद्धान्तों को ग्रहण कर सकता है। अब, आकाश और प्राण, दोनों जगदव्यापी महत , समष्टि-मन , ब्रह्मा या ईश्वर से उत्पन्न हुए हैं। श्री टेस्ला समझते हैं कि गणितशास्त्र की सहायता से वे यह प्रमाणित कर सकते हैं कि जड़ और शक्ति -दोनों ही पोटेंशियल एनर्जी (ओजस ?) में रूपान्तरित हो सकते हैं। गणितशास्त्र के इस नवीन प्रमाण को समझने के लिए मैं आगामी सप्ताह में उनसे मिलने जानेवाला हूँ।"  

Nikola Tesla के लिए चित्र परिणाम
(११ सितम्बर १८९३ को स्वामी विवेकानन्द के प्रसिद्द शिकागो भाषण के समय  महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला  उनके ठीक बायीं ओर बैठे हैं ! )

स्वामी विवेकानन्द के अमेरिकी मित्र और महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला,को अब तक धरती पर उत्पन्न 
(मोस्ट  इनोवेटिव  एंड  मिस्टीरियस ) सर्वाधिक मौलिक एवं रहस्यपूर्ण मनुष्यों में से एक माना जाता है। वे एक ऐसे महापुरुष थे, जो अपने समय से आगे की बातों को भी देखने में सक्षम थे, तथा आज हमलोग अपने व्यावहारिक जीवन में जिन वैज्ञानिक आविष्कारों या टेक्नोलॉजी उपयोग कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश का श्रेय श्री टेस्ला को ही जाता है। 
उन्होंने कहा था -" आइ वांटेड टु इल्यूमिनेट दी होल अर्थ !  मैं सम्पूर्ण पृथ्वी को बिजली के प्रकाश से रोशन कर देना चाहता था। वहाँ अंतरिक्ष में इतनी पर्याप्त बिजली है, जिससे दूसरे सूर्य का निर्माण किया जा सकता है । वह प्रकाश भूमध्यरेखा ( इक्वैटर) के चारों ओर उसी प्रकार से दिखाई पड़ेगा जिस प्रकार शनि ग्रह के चारों और एक अँगूठी दिखाई देती है।" 
[साभार : http://www.ancient-code.com/nikola-teslas-extraordinary-interview-hidden-116-years/] 
उस साक्षात्कार में श्री टेस्ला ने आगे कहा था - "एवरीथिंग इज़ दी लाइट" इस वाक्य को समझने की जरूरत नहीं, इस पर विश्वास करना ही यथेष्ट है। हर वस्तु प्रकाश (ब्रह्म?) है ! जिस प्रकार हम महान प्रकाश पुंज के स्रोत के रूप में हमलोग सूर्य को देखते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक किरण (चमक) होती है, और उसकी यह चमक ही उस देश का भाग्य होता है। और याद रखना -जिसका भी जन्म हुआ है, एक दिन अवश्य मरेगा ! [वे कहाँ जाते हैं ?] वे प्रकाश (ओजस?) के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं, और इस रूप में अब भी उनका अस्तित्व है। सम्पूर्ण रहस्य इस सच्चाई में निहित है कि -"लाइट पार्टिकल्स रिस्टोर देयर ओरिजिनल स्टेट"- प्रकाश के कण पुनः अपने मूल स्वरूप को प्राप्त हो जाते हैं। ऐंड रिमेम्बर: नो वन मैन, दैट इग्ज़िस्टेड, डिड नॉट डाइ।" 
[साभार/ http://www.freedomtek.org/en/texts/nikola_tesla_interview_1899.php] 

१८९९ में Immortality (अमरत्व) नामक पत्रिका के पत्रकार जॉन स्मिथ ने कोलोराडो स्प्रिंग्स की प्रयोगशाला में (जहाँ अमेरिकी वायुसेना एकेडमी है) महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला का जो साक्षात्कार ११६ वर्ष पूर्व लिया था, उसका सम्पूर्ण भावानुवाद यहाँ प्रस्तुत है:  

पत्रकार: श्री टेस्ला,आपने उस महापुरुष जैसी महिमा प्राप्त कर ली है, जो मानो स्वयं ही कॉस्मिक प्रोसेस (ब्रह्माण्डीय व्यवस्थाक्रम) में घनिष्ट रूप से इन्वाल्व्ड (जुड़ा) हुआ हो ! श्री टेस्ला आप कौन हैं ? 

[ठीक ऐसा ही प्रश्न भागवत में जड़भरत और राजा रहूगण संवाद में मिलता है -महात्मा जड़भरत जी सिन्धु देश के राजा रहूगण से कहते है - हे राजन ! तुम मुझसे पूछते हो कि मै कौन हूँ ? किन्तु तुम स्वयं से पूछो कि तुम कौन हो ? जगत स्वप्न जैसा है।

Nikola Tesla के लिए चित्र परिणाम

टेस्ला :श्री स्मिथ, यह बिल्कुल सही सवाल है। और मैं तुमको इसका सही सही उत्तर देने की चेष्टा करूँगा। 

पत्रकार: कुछ लोग कहते हैं आप क्रोएशिया के उस क्षेत्र को बिलॉन्ग करते हैं जिसे लीका कहा जाता है। 
जहां लोगों के साथ मिलकर पेड़, चट्टान, और तारों से परिपूर्ण आकाश भी विकसित होते हैं। वे कहते हैं कि आपके पैतृक गाँव का नाम किसी पहाड़ी फूल के नाम पर रखा गया है; तथा जिस घर में आप पैदा हुए थे, वह बिल्कुल जंगल और चर्च के बगल में था। 

टेस्ला : तुमने जो कुछ कहा है - वह बिल्कुल यह सच है। मुझे अपने सर्बियाई मूल का होने पर तथा मेरी
क्रोएशियाई मातृभूमि पर गर्व है।

पत्रकार: भविष्यवादियों का कहना है कि बीसवीं और इक्कीसवीं सदी निकोला टेस्ला के मस्तिष्क में पैदा हुई थी। वे 'मैग्नेटिक फील्ड' (चुम्बकीय क्षेत्र)  एवं 'इंडक्शन मोटर' के आविष्कार का जश्न मनाते हैं। इसके सृष्टिकर्ता (creator) को एक शिकारी कहते हैं जिसने पृथ्वी की गहराई से लाइट (प्रकाश) को निकाल कर अपने जाल में फँसा लिया था, और उस योद्धा प्रोमिथियस की तरह महान समझते हैं -जिसने स्वर्ग से अग्नि को चुराकर मानवजाति को उपहार में दे दिया था। 'अल्टरनेटिंग करेन्ट ' के जनक के रूप में आप फिजिक्स और केमिस्ट्री को आधी दुनिया में फैला रहे हैं। औद्योगिक जगत आपको अपना सर्वोच्च सन्त घोषित करेगा, और बैंकर आपको अपना सबसे बड़ा संगरक्षक मानेंगे। निकोला टेस्ला की प्रयोगशाला में ही परमाणु का सर्वप्रथम विखण्डन हुआ है। वहाँ एक ऐसा मशीनी हथियार बनाया गया है, जो अर्थक्वेक वाइब्रेशन्स (भूकम्प का कम्पन) उत्पन्न कर सकता है। वहाँ ब्लैक कॉस्मिक किरणों का अविष्कार हुआ है। "टेम्पल ऑफ़ दी फ्यूचर" भविष्य के मन्दिर में पाँच जातियाँ उसकी उपासना करेंगी, क्योंकि उसने उस महान रहस्य को उद्घाटित किया था कि एमपोडिकल एलीमेन्ट्स (पंच महाभूतको आकाश (ईथर) से प्राप्त प्राण-ऊर्जा (लाइफ फोर्सेज) के द्वारा पुनः बूना जा सकता है। (वेदान्त का पंचमहाभूत = Greek philosopher, born in Sicily. He taught that the universe is composed of fire, air, water, and earth, which mingle and separate under the influence of the opposing principles of Love and Strife.) 

टेस्ला : हाँ, ये सभी मेरे सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से हैं। फिर भी मैं स्वयं को एक पराजित व्यक्ति समझता हूँ, क्योंकि मैं उस सबसे बड़े कार्य को सम्पन्न नहीं कर सका, जिसे मैं करना चाहता था। 


पत्रकार: वे कार्य क्या है, श्री टेस्ला ?

टेस्ला : आइ वांटेड टु इल्यूमिनेट दी होल अर्थ !  मैं सम्पूर्ण पृथ्वी को बिजली के प्रकाश से रोशन कर देना चाहता था। वहाँ अंतरिक्ष में इतनी पर्याप्त बिजली है, जिससे दूसरे सूर्य का निर्माण किया जा सकता है । वह प्रकाश भूमध्यरेखा (equator) के चारों ओर इस प्रकार दिखाई पड़ेगा जिस प्रकार शनि ग्रह के चारों और एक अँगूठी दिखाई देती है। किन्तु मानव जाति अभी तक महान और अच्छे विचारों को ग्रहण करने में सक्षम नहीं बन सकी है। कोलोरेडो स्प्रिंग्स की धरती को मैंने बिजली से सिक्त कर दिया था। उसी प्रकार हमलोग दूसरी ऊर्जाओं से -यथा सकारात्मक मानसिक ऊर्जा से भी धरती को अभिसिंचित कर सकते हैं। बाख या मोजार्ट के संगीत में तथा अन्य महान कवियों के छन्दों में भी वही ऊर्जा है। पृथ्वी के अभ्यन्तर में (आंतरिक भाग में) शांति,आनन्द और प्रेम की ऊर्जा भरी हुई है। वही ऊर्जा अपने को कई रूपों में रूपांतरित कर लेती है, और जिसकी अभिव्यक्ति वह हमारे लिये सुन्दर-सुन्दर फूलों को ऊगा कर, या अन्न-फल उपजा कर तथा वह सब (झरना-नदी का रूप धारण) करके धरती को हमारे रहने योग्य-हमारी मातृभूमि बना देती हैं ! मैंने इसी खोज में वर्षों  बिता दिए हैं कि -किस उपाय से इस ऊर्जा को मनुष्यों के लिए लाभकारी बनाया जा सकता है। जैसे गुलाब के सौन्दर्य और उसकी खुशबू का उपयोग चिकित्सा में किया जा सकता है, तथा सौरऊर्जा से भोजन प्राप्त किया जा सकता है। " लाइफ हैज ऐन इनफिनिट नंबर ऑफ़ फॉर्म्स, ऐंड दी ड्यूटी ऑफ़ साइंटिस्ट्स इज टु फाइंड देम इन एव्री फ़ॉर्म ऑफ़ मैटर ". - जीवन के अनन्त रूप हैं, तथा वैज्ञानिकों का कर्तव्य है कि वह उन्हें जड़-पदार्थों के प्रत्येक रूप में आविष्कृत करे। इसके लिए तीन बातें जरुरी हैं। मैं जो कुछ भी करता हूँ -उसमें उसीकी खोज करता हूँ। मैं जानता हूँ कि मैं उन्हें पा नहीं सकता, किन्तु मैं प्रयास करना नहीं छोड़ूँगा। 



पत्रकार: वे तीन चीजें क्या हैं?



टेस्ला : पहला मुद्दा है - भोजन। क्या तारकीय और स्थलीय ऊर्जा पृथ्वी पर प्रत्येक मनुष्य का भूख मिटाने के लिए पर्याप्त नहीं है ? " विथ व्हाट वाइन वाटर्ड ऑल थर्स्टी " क्या कोई वैसी शराब बनाई जा सकती  है - जिसे पीने से, प्रत्येक मनुष्य की प्यास सदा के लिए मिट जाये, उसका हृदय आनन्द से खिल उठे और वह यह समझ सके कि वह स्वयं ईश्वर (निःस्वार्थपरता) हैं !! एक बात और मैं यह चाहता हूँ कि जिन बुरी शक्तियों के प्रभाव से मनुष्य आजीवन दुःख-कष्ट में ही अपना समय बिताने को बाध्य है, उस बुराई की शक्ति को जड़ से मिटा दूँ, जो कभी कभी अंतरिक्ष से एक महामारी के रूप में प्रकट होते हैं। इस सदी में यह रोग पृथ्वी से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में फ़ैल गया था।
तीसरी बात यह है: इज  देयर ऐन एक्ससेस-लाइट इन दी  यूनिवर्स? क्या वहाँ ब्रह्मांड में एक अतिरिक्त 
प्रकाश है ?  मैंने एक सितारा खोज निकाला है जिसके कारण समस्त खगोलीय और गणितीय नियम तिरोहित हो सकते हैं, और उसमें कुछ भी संसोधित नहीं करना होगा। वह सितारा इसी आकाशगंगा में है।वह हमारे सौर मण्डल से भी अधिक भारी है, इसलिये इसका प्रकाश इतने घनत्व से प्रकट हो सकता है कि मानो उसके लिये यह धरती सेव की तुलना से भी छोटी हो। हमारे धर्म और दर्शन (वेदान्त) यह सिखाते हैं कि प्रत्येक मनुष्य में ईसा, बुद्ध, या जोरास्टर बन जाने की सम्भावना है। किन्तु मैं जो प्रमाणित करना चाह रहा हूँ, वह अधिक विस्तीर्ण और लगभग अलभ्य वस्तु है। चुँकि प्रत्येक मनुष्य जन्मजात रूप से ईसा, बुद्ध या जोरास्टर है, अतः हमें सम्पूर्ण विश्व को ऐसे मनुष्यों से भर देना है !  

पत्रकार: "वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल" के तैतीसवें मंजिल पर, जहाँ आपका आवास है; मैंने सुना है वहाँ आपके कमरे की खिड़की पर प्रतिदिन सुबह में पक्षी आ जाते हैं। 

टेस्ला : प्रत्येक मनुष्य को पक्षियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। इसका कारण है उनके पंख " ह्यूमन हैड देम वन्स, दी रियल ऐंड विज़िबल!" -क्योंकि एक समय में मनुष्यों के पास भी पंख थे -बिल्कुल असली और प्रत्यक्ष देखे जाने वाले ! 

पत्रकार: जब आप समिलजान  (वह गाँव जहाँ निकोला टेस्ला का जन्म हुआ था) में थे ; उस समय से अभी तक आपने उड़ान बन्द नहीं किया है।

टेस्ला : मैंने छत पर चढ़ कर उड़ान भरना चाहा था - और मैं गिर पड़ा था: बच्चों की गणना गलत हो सकती है। 'रिमेम्बर, दी युथ विंग्स हैव एवरीथिंग इन लाइफ!'- किन्तु याद रखना , युवाओं के पंखों में जीवन का सब कुछ है !

पत्रकार: क्या आपने कभी शादी की है? आप के दिल में किसी महिला के प्रति प्रेम था या नहीं, यह बात 
दुनिया को ज्ञात नहीं है। आपके युवा-काल की तस्वीरों को देखकर तो ऐसा लगता है कि जवानी के दिनों में आप काफी रूपवान व्यक्ति थे।  

टेस्ला : हाँ, यह सही है कि मैंने शादी नहीं की। देयर आर टू व्यूज: " ए लॉट ऑफ़ अफ़ेक्शन ऑर नॉट एट ऑल"। स्त्री-प्रेम को लेकर दो प्रकार के विचार रहे हैं- या तो कामना-वासना में घोर अनुरक्ति अथवा लेश मात्र भी नहीं! " दी सेण्टर (मूलाधार चक्र) सर्व्स टु रेजुवेनेट द ह्यूमन रेस." मूलाधार चक्र में संचित क्रियेटिव एनर्जी (सृजनात्मक ऊर्जा या यौन ऊर्जा) ही मनुष्य जाति को रिजूवनैट करने या जीवन्तता प्रदान करने ( फिर से जवान या युवा बना देने) का कार्य करता है। 'वीमेन फॉर सर्टेन पीपल नर्चर्स एंड स्ट्रेंग्थेन इट्स विटेलिटी एंड स्पिरिट.' --अर्थात कुछ व्यक्तियों (प्रवृत्ति मार्गियों) के लिये पत्नी या प्रेमिका ही उनके 'विटेलिटी एंड स्पिरिट' को, अर्थात 'प्राण और आत्मा' को नर्चर तथा स्ट्रेंथेन करने खिला देने तथा पुष्ट बनाने का कार्य करती हैं। जिस प्रकार एक श्रेणी के लोगों की प्राण-शक्ति (चेतनतत्त्व-vitality) एवं भावनाओं को स्त्रियाँ उनकी पोषित करके और दृढ़ बना देती हैं। ठीक उसी प्रकार - " बीइंग सिंगल ड्ज दी सेम टु अदर पीपल." -अन्य श्रेणी के व्यक्तियों (निवृत्ति मार्गियों) के लिये कुँवारा रहना भी ठीक उसी प्रकार से  कार्य करता है। मैंने दूसरे मार्ग (निवृत्ति मार्ग) का चयन किया ! 

पत्रकार: आपके प्रशंसक भी यह शिकायत कर रहे हैं कि -' यू आर अटैकिंग रिलेटिविटी',  आप सापेक्षता के सिद्धान्त पर हमला कर रहे हैं? 'दी स्ट्रेंज इज योर असर्शन दैट द मैटर हैज नो एनर्जी. एवरीथिंग इज एम्बयूड विथ एनर्जी, व्हेयर इट इज ? आपका यह अभिकथन  कि जड़ वस्तुओं (मैटर) में ऊर्जा नहीं होती, बल्कि वास्तव में सब कुछ में ऊर्जा ही व्याप्त है या ऊर्जा ही हर वस्तु में ओत-प्रोत है " को सुनकर बड़ा आश्चर्य होता है। पहले जड़ वस्तुयें  उत्पन्न हुई या  ऊर्जा ?

टेस्ला : पहले ऊर्जा उत्पन्न हुई, उसके बाद जड़  वस्तुएं ! 

पत्रकार: श्री टेस्ला, यह तो मानो वही बात हुई जैसे आप कह रहे हैं - आप अपने पिता से पहले पैदा हुए थे, पिता के बाद नहीं ? [पहले - अण्डा या मुर्गी ?] 

टेस्ला : बिल्कुल सही! ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं? ' मैटर इज क्रिएटेड फ्रॉम दी ओरिजिनल एंड इटरनल एनर्जी दैट वी नो ऐज लाइट.' --- मैटर (जड़ पदार्थ पंच महाभूत) की उत्पत्ति
मूल आद्याशक्ति या अनन्त ऊर्जा (original and eternal energy) से हुई है, जिसे हम प्रकाश के रूप में जानते हैं। विद्युत्-का प्रकाश कौंधा और ब्रह्मांड में स्टार, ग्रह,और पृथ्वी पर-पेड़-पहाड़-नदी- पशु-मनुष्य सब कुछ-- पूरा विश्व दिखने लगा ! 'मैटर इज ऐन एक्सप्रेशन ऑफ इनफिनिट फॉर्म्स ऑफ़ लाइट, बिकॉज़ एनर्जी इज ओल्डर देन इट.'---क्योंकि ऊर्जा (शक्ति) पदार्थ से अधिक पुरानी है (सृष्टि के पहले से काम के रूप में अवस्थित है), अतः सभी पदार्थ लाइट (विद्युत् ? ऊर्जा ) के अनन्त रूपों की अभिव्यक्ति है। ' देयर आर फोर लॉज़ ऑफ क्रिएशन'.- सृष्टि के के चार नियम हैं। सृष्टि का पहला स्रोत सबसे चौंकाने वाला, अत्यन्त विस्मयकारी - डार्क एनर्जी है, जिसे हमारा मन समझ नहीं सकता, या गणित के द्वारा उसे मापा नहीं जा सकता। फिर भी यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उसमें पूरी तरह से समा सकता है। ('दी सेकंड लॉ इज स्प्रेडिंग डार्कनेस, व्हिच इज़ दी  ट्रू नेचर ऑफ़ लाइट, फ्रॉम दी इनएक्सप्लिकेबल, ऐंड इट'स ट्रान्सफोर्मेड इन्टु द लाइट.') दूसरा नियम है कि अनिवर्चनीय (inexplicable जिसे मुंह से बोलकर समझाया नहीं जा सकता) प्रकाश का सच्चा स्वरूप- 'उस अंधकार को प्रसारित करना है जो पुनः प्रकाश के रूप में रूपान्तरित हो जाता है। 'दी थर्ड लॉ इज द नेसेसिटी ऑफ़ दी लाइट टु बिकम अ मैटर ऑफ़ लाइट.' प्रकाश की अनिवार्यता है कि वह 'मैटर ऑफ़ लाइट'  (प्रकाश-वस्तु)  के रूप में रूपांतरित हो जाये  - यह सृष्टि का तीसरा नियम है। दी फोर्थ लॉ इज : नो बिगनिंग एंड नो इंड; थ्री प्रीवियस लॉज़ ऑलवेज टेक प्लेस एंड दी क्रिएशन इज  इटरनल. चौथा नियम यह है -कि यह सृष्टि अनादि -अनन्त है, पूर्वकथित तीनों नियम सृष्टि और लय निरन्तर होते रहते हैं, किन्तु सृष्टि शाश्वत है।  

पत्रकार: क्या सापेक्षता के सिद्धांत का विरोध करते हुए इतने आगे बढ़ जाते हैं, कि आप अपने जन्मदिन की पार्टियों में इसके अविष्कारक के विरुद्ध व्याख्यान भी देते हैं ? 

टेस्ला : आपको यह स्मरण रखना चाहिये कि, यह अंतरिक्ष कर्व्ड (वक्र या घुमावदार)  नहीं है;
बल्कि हमारा मन ही अनन्त देश और अनन्त काल (infinity and eternity) को  समझ नहीं पाता है !  यदि सापेक्षता के सिद्धान्त को इसके निर्माता स्पष्ट रूप से समझ लेते, तो वे भी अमरत्व को प्राप्त हो जाते, यहाँ तक कि, यदि चाह लेते तो  शारीरिक रूप से भी! मैं अनंत प्रकाश (ज्योति) का एक अंश हूँ, और वह संगीतमय (कम्पन) है। यह ज्योति मेरी छः इन्द्रियों को भर देती है - मैं इसे देखता हूँ, सुनता हूँ, महसूस करता हूँ, सूँघता हूँ, स्पर्श करता हूँ, और चिंतन करता हूँ । चिंतन करने से तात्पर्य मेरी छठी इन्द्रिय से है। 
"पार्टिकल्स ऑफ़ लाइट आर रिटेन नोट. बोल्ट ऑफ़ लाइटनिंग कैन बी ऐन इन्टायर सोनाटा." प्रकाश के सूक्ष्म कण लिखित लिपि हैं। जबकि थंडरबोल्ट की चमक एक पूर्ण संगीत रचना (sonata) है । यदि आप बिजली की हजारों गेंदों की कड़क को सुने -तो वे मानो किसी संगीत समारोह में गूंजते हुए सहवादन -संगीत से प्रतीत होंगे। इस संगीत समारोह के लिए मैंने एक 'बॉल लाइटनिंग' की रचना की है, जिन्हें हिमालय की बर्फीली चोटियों पर सुना जा सकता है।
 'अबाउट पाइथागोरस एंड मैथमेटिक्स, या साइंटिस्ट मई नॉट एंड मस्ट नॉट इन्फ्रिंज ऑफ़ दीज टू.' कोई वैज्ञानिक पाइथागोरस एवं गणित इन दो विषयों का अतिक्रमण नहीं कर सकता, और कभी करना भी नहीं चाहिये। नंबर्स ऐंड इक्वैश़न्स (संख्या गिनती और समीकरण) वे संकेत हैं, जो ग्रह मण्डल के संगीत को चिन्हित करते हैं। (गिनती आविष्कार पहले भारत में हुआ कुरान के प्रत्येक पृष्ठ की गिनती हिन्दी में है।) यदि आइंस्टीन ने इन ध्वनियों को सुन लिया होता तो, वे सापेक्षता के सिद्धान्त की रचना ही नहीं करते। (दीज साउंड्स आर दी मेसेज्स टु दी माइंड दैट - 'लाइफ हैज मीनिंग' दैट दी यूनिवर्स इग्जिस्ट्स इन परफेक्ट हारमनी, ऐंड इट्स ब्यूटी इज दी कॉज ऐंड इफेक्ट ऑफ क्रिएशन.)
ये ध्वनियाँ मन को दिये जाने वाले वे सन्देश हैं - जिसमें कहा जा रहा है कि इस जीवन का कोई उद्देश्य है, और यह ब्रह्माण्ड पूर्ण सामंजस्य में अवस्थित है, तथा इस सृष्टि का कारण और कार्य ही इसकी सुन्दरता है। यह संगीत (अनहद नाद) नक्षत्रीय स्वर्गों का शाश्वत स्वर है। छोटे छोटे तारों ने (सप्तर्षि मण्डल ने) गीत रचना को पूरा कर लिया है, तथा वे भी इस दिव्य सिम्फनी का हिस्सा बन गए हैं। मनुष्य के दिल की धड़कनें भी पृथ्वी की सिंफनी का हिस्सा हैं। न्यूटन ने यह जान लिया था कि सारा रहस्य ज्यामितीय व्यवस्था और खगोलीय पिण्डों की गति में है। वे यह स्वीकार करते थे कि- 'सुप्रीम लॉ ऑफ़ हारमनी इग्जिस्ट्स इन दी यूनिवर्स' -अर्थात सर्वधर्म समन्वय या अविरोध (harmony) का सर्वोच्च सिद्धान्त ब्रह्माण्ड में पहले से विद्यमान है। 'कर्व्ड स्पेस' की परिकल्पना तो अराजकता है, और अराजकता कभी संगीत नहीं हो सकता। आइंस्टीन तो विस्फोट-ध्वनि और प्रकोप के अग्रदूत हैं।     

पत्रकार: श्री टेस्ला, क्या आप उस संगीत को सुन सकते हैं ?

टेस्ला : मैं तो उन ध्वनियों को निरन्तर सुनता रहता हूँ। मेरे आध्यात्मिक कान (spiritual ear) उतने ही विशाल हैं, जितना वह आकाश जिसे हम अपने ऊपर देखते हैं। मेरे प्राकृतिक कान वे हैं जिसे मैं ने राडार जैसा विकसित कर लिया है। सापेक्षता के सिद्धान्त अनुसार -'दो समानान्तर रेखायें (जीव और ब्रह्म) अनन्त में पहुँचकर मिल जायेंगी। ' और  वहाँ 'आइंस्टाइन्स कर्व '- आइंस्टीन की वक्रता भी सीधी हो जाएगी। एक बार अविष्कृत हो जाने के बाद वह ध्वनि (चैतन्यता का स्पंदन) सदा के लिये बना रहता है। किसी एक व्यक्ति के लिये यह गायब या अन्तर्धान हो सकता है, किन्तु मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति -'मौन' (निःशब्दता) में इसका अस्तित्व सदैव बना रहता है। नहीं, श्री आइंस्टीन से मुझे कोई शिकायत नहीं है। वे एक दयालु व्यक्ति हैं, तथा उन्होंने कई अच्छे कार्यों को किया है। उनके कुछ कार्य तो इस संगीत के अंश बन जायेंगे। मैं उन्हें एक पत्र लिखूँगा तथा यह समझाने की चेष्टा करूँगा कि  'ईथर (या हिग्स बोसॉन?) का अस्तिव है' ; तथा ये ही वे सूक्ष्म कण हैं जो ब्रह्माण्ड (सम्पूर्ण जगत) को सामंजस्य (अविरोध या harmony) में रखते हैं, तथा जीवन को शाश्वत बनाते हैं। 

पत्रकार: टेल मी, प्लीज, अंडर व्हाट कंडीशन्स एंजेल अडॉप्ट ऑन दी अर्थ? श्री टेस्ला, कृपया मुझे यह बतलायें कि पैगम्बर (मानवजाति का मार्दर्शक नेता) किन शर्तों को अंगीकार करके धरती पर आविर्भूत होते हैं?  

टेस्ला : मैं नेताओं या देवदूतों के आविर्भाव की दस शर्तों  को बतलाऊँगा, तुम सतर्क होकर उन्हें नोट कर लो।  

पत्रकार: प्रिय श्री टेस्ला, मैं आपके सभी शब्दों को एक दस्तावेज़ के रूप में संचित रखूँगा।

टेस्ला : पहली आवश्यकता है-' हाई अवेयरनेस ऑफ इट्स मिशन एंड वर्क्स टु बी डन !'  उसे अपने मिशन जीवन का उद्देश्य और जो कार्य करने हैं, उसके प्रति उच्च श्रेणी की जागरूकता रहनी चाहिये। चाहे मन्द रूप से ही रहे, किन्तु बचपन से ही उसकी यादें बनी रहनी चाहिये। किन्तु दिखावटी रूप से विनम्र बनने की आवश्यकता नहीं है। शाहतूत (Oak) के वृक्ष को यह पता होता है कि वह शहतूत है, जबकि उसके बगल में उगी कोई झाड़ी केवल एक झाड़ी है। जब मैं १२ वर्ष का था, मुझे यह पक्का विश्वास था कि मुझे नियाग्रा फाल्स का निर्माण करना है। जितने भी आविष्कार मैंने किये हैं, मैं अपने बचपन से ही जानता था-एक दिन मैं उन्हें अवश्य प्राप्त करूँगा; हालाँकि पूरी तरह से जब स्पष्ट दृष्टिगोचर नहीं होता था, तब भी कोई दूसरा मार्ग जरूर होगा -जिसे लागु करके पूरा करूँगा -यह दृढ़ संकल्प अवश्य था। और जो कुछ आविष्कार मैं कर सकता था, उसे मैंने पूरे कर लिये हैं। 

पत्रकार: श्री टेस्ला, ब्रह्माण्ड के साथ अविरोध समन्वय स्थापित करने वाले नेता की तीसरी शर्त क्या है? 

टेस्ला : श्रम करते समय भरपूर प्राण-ऊर्जा को आध्यात्मिक ऊर्जा में रूपान्तरित कर देने के लिए मार्गदर्शन की प्रार्थना। क्योंकि मनुष्यों की कई जरूरतें और प्रभाव ऐसे होते हैं, जिनका शुद्धिकरण करना होता है। इसीलिये मुझे कुछ भी खोना नहीं पड़ा है, बस केवल प्राप्त ही किया है। इसलिये मैंने हर दिन हर रात को आनन्द में बिताया है। तुम लिख लो कि निकोला टेस्ला एक मस्त इंसान था। चौथी आवश्यक शर्त है (व्यायाम और पौष्टिक आहार) शरीर को इतना हृष्ट-पुष्ट रखना जो कार्य के लिए अनुकूल हो।  

पत्रकार:  श्री टेस्ला, आपके कहने का अर्थ क्या है?  

टेस्ला : सबसे पहले, मनुष्य के प्रमुख अवयवों (3H?) का तंदरुस्त रख-रखाव। मैन्स बॉडी इज अ परफेक्ट मशीन. मनुष्य का शरीर एक परिपूर्ण मशीन है। मैं अपने शारीरिक परिपथ को जानता हूँ, और उसके लिए क्या अच्छा है वह भी मुझे पता है। जो खाद्यपदार्थ लगभग सभी लोग खाते हैं, मेरे लिये वे हानिकारक और खतरनाक हैं। कभी कभी मैं यह कल्पना भी करता हूँ कि दुनिया के सारे शेफ मेरे विरुद्ध साजिश कर रहे हैं .....मेरे हाथों को छूकर देखो। 

पत्रकार: (छूकर कर बोला) यह ठंडा है।

टेस्ला : हाँ, रक्त-प्रवाह को कई तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है। तुम एक भयभीत युवा क्यों हो?  

पत्रकार:  एक कहानी यह भी है कि मार्क ट्वेन ने अपनी पुस्तक 'द मिस्टीरियस स्ट्रेंजर' में जिस अद्भुत पात्र शैतान ( "Satan" or "No. 44") का उल्लेख किया था, वह आप से ही अनुप्रेरित था ?   

टेस्ला : (शैतान के लिये प्रयोग किया जाने वाला -Lucifer शब्द) यह जो 'ल्यूसिफऱ' शब्द है वह अधिक आकर्षक है। श्री ट्वेन हँसमुख व्यक्ति हैं, मजाक करना पसंद करते हैं। बचपन में एक बार उनकी पुस्तक पढ़कर मैं चंगा हो गया था। जब यहाँ उनसे मुलाकात होने पर यह घटना मैंने उन्हें सुनाई तो इस बात ने उनके दिल को इस कदर छू लिया कि वे रो उठे। हमलोग अच्छे दोस्त बन गये, और अक्सर वे मेरी प्रयोगशाला में आने लगे। एक बार उन्होंने अनुरोध किया कि मैं उन्हें कोई ऐसी मशीन दिखाऊँ जो ' बाइ वाईब्रेशन प्रोभोक्स अ फिलिंग ऑफ़ ब्लिस" -अपने कम्पन द्वारा आनन्द के एहसास को उत्पन्न कर सकती हो। मेरे पास वैसी एक मशीन थी जिसे मैंने मनोरंजन के लिये आविष्कृत किया था, और कभी कभी वैसा करना पसन्द करता था। मैंने श्री ट्वेन को आगाह कर दिया कि इन कम्पनों के प्रभाव में अधिक देर तक मत रहियेगा। उन्होंने मेरी बात नहीं मानी, और लम्बे समय तक उन कम्पनों के प्रभाव में रहे। जिसका अंत इस प्रकार हुआ कि वे अपने पैन्ट को पकड़े हुए, किसी रॉकेट की गति से एक झपट्टा मारकर एक कमरे में घुस गए। यह शैतानी रूप से हास्यास्पद था, किन्तु मैंने गम्भीरता बनाये रखी। 
किन्तु शारीरिक परिपथ में सामंजस्य को बनाये रखने के लिये, भोजन के आलावा स्वप्न देखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। किसी लम्बे और थकाऊ कार्य को करने में जिस अमानुषी प्रयास को लगाना पड़ता है, उसे करने के बाद यदि मैं एक घन्टे तक नींद ले लूँ तो मैं पूरी तरह से तरो-ताजा हो जाता हूँ। मैंने नींद लेने की क्षमता को इस प्रकार व्यवस्थित कर लिया है कि अपने द्वारा निर्दिष्ट समय के अनुसार मैं सो सकता हूँ और जाग सकता हूँ। जब कोई ऐसा कार्य करता हूँ, जिसे पूरी तरह से समझ नहीं पाता, तो मैं स्वप्न में स्वयं को उसी विषय के ऊपर सोचने के लिये बाध्य करता हूँ, और इस प्रकार उस समस्या का समाधान प्राप्त कर लेता हूँ। 
टेस्ला ने पुनः कहा : एकीकरण की पाँचवी शर्त स्मृति-शक्ति है। शायद अधिकांश लोगों के लिये, दुनियावी ज्ञान तथा जीवन के अनुभवों से संचित ज्ञान को स्मृति में रखने का कार्य मस्तिष्क ही करता है। किन्तु मेरा मस्तिष्क याद रखने की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त रहता है, जिस क्षण के लिये जो आवश्यक है, यह केवल उसी का चयन करता रहता है। जो हमें चाहिये वह हर समय हमारे आस पास ही रहता है। उसे केवल प्रयुक्त करने की जरूरत है। वह सब कुछ जिसे हमने एक बार देखा, सुना, पढ़ा है वे प्रकाश के कणों के रूप में हमारे साथ साथ चलते रहते हैं। ये सूक्ष्म प्रकाश कण मेरे लिये सदैव आज्ञाकारी और निष्ठावान बने रहते हैं। गेटे (Johann Wolfgang von Goethe) की रचना फ़ाउस्ट मेरी पसन्दीदा पुस्तक है, जिसे एक विद्यार्थी के रूप में जर्मनी में कण्ठस्थ कर लिया था, और आज भी उसे मैं पूरा सुना सकता हूँ। मेरे समस्त अविष्कार मेरे मन में वर्षों से पड़े हुए थे, और बाद में उन्हें मैंने केवल साधित किया है। 

पत्रकार: आप अक्सर मानस -दर्शन शक्ति (पॉवर ऑफ़ विजुअलाइजेशन*) का उल्लेख भी किया करते हैं।

टेस्ला : मैं ने जो भी आविष्कार किये हैं, उसके लिये मुझे इसी मानस-दर्शन शक्ति को धन्यवाद देना चाहिये। मेरे जीवन की प्रत्येक घटना और मेरे आविष्कार मेरी आँखों के सामने उसी प्रकार यथार्थ में घटित हुए हैं, जिन्हें मैंने अपनी कल्पना में देखा था। अपने युवा अवस्था में मैं नहीं जानता था कि यह क्या है, इसलिये मैं डर गया था, किन्तु बाद में मैंने इस शक्ति को एक असाधारण प्रतिभा और दैवी उपहार की तरह उपयोग में लाना सीख लिया। मैंने इसे पल्लवित किया, सतर्कता से महफूज रखा। मैंने अपने अधिकांश अविष्कारों में इसी मानस-दर्शन शक्ति का प्रयोग करके सुधार लाने का प्रयास किया, और उन्हें पूर्ण किया। जटिल गणितीय समीकरणों को भी मानस-दर्शन शक्ति के द्वारा हल कर लेता हूँ। जो दैवी उपहार मुझे मिला है, यदि तिब्बत में होता तो उच्च पदस्थ लामा का तगमा मिल चुका होता।    

पत्रकार: जवानी में, आप कई बार गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। कायनात के साथ सामंजस्य स्थापित करने या अविरोध की स्थिति में रहने के लिये क्या इस प्रकार बीमार होना भी एक आवश्यकता है?

टेस्ला : हाँ, यह अक्सर थकावट या प्राण-शक्ति (vital force) की कमी के कारण होती है, लेकिन बीमार होना अक्सर यही सिद्ध करता है कि जो विषाक्त पदार्थ भीतर जमा हो गए थे उनसे शरीर और मन को शुद्धिकरण करने लिये बुखार या अन्य कोई बीमारी हुई है। इसीलिये मनुष्य समय समय पर रोग-ग्रस्त हो जाता है। अधिकांश बिमारियों का स्रोत मनुष्य का मन है। इसलिये मन को निर्मल बनाने से अधिकांश बिमारियों से बचा जा सकता है। एक बार विद्यार्थी जीवन में, आँतों में विषाणुओं के जमा हो जाने के कारण मैं हैजा से ग्रस्त हो गया था। किन्तु मेरे पिता ने मुझे उस तकनीक का अध्यन करने की अनुमति देदी जो जीवन-गठन करने में सहायक हो, और इस प्रकार मैं ठीक हो गया। 
" इलूशन (Illusion- हिप्नोटाइज्ड स्टेट ऑफ़ माइंड) फॉर मी वाज नॉट अ डिजीज, बट दी माइंड्स एबिलिटी टू पेनिट्रेट बियॉन्ड दी थ्री डाइमेंशन्स ऑफ़ दी अर्थ.--अर्थात मिथ्याधारणा,  मतिभ्रम या मोहग्रस्त अवस्था मेरे लिये कोई बीमारी नहीं थी --बल्कि मैं इसे पृथ्वी के तीन आयामों (टाइम-स्पेस-कॉजेशन) का उलंघन करके परलोक (beyond) तक घुस जाने या आर-पार हो जाने की मन की विशेष क्षमता (युवाओं के पंख ?) मानता था। 
स्वयं को डीहिप्नोटाइज्ड कर लेने की क्षमता (स्वयं को मोह से मुक्त कर लेने की क्षमता भेंड़त्व को समाप्त कर सदैव सिंहत्व में ही स्थित रहने की क्षमता) आजीवन मेरे साथ रही है । " आइ हैड देम ऑल माई लाइफ, ऐंड आइ हैव रिसीव्ड देम ऐज ऑल अदर फिनॉमिना अराउंड अस." तथा जिस प्रकार जीवन में हमारे आसपास कई प्रकार की घटनायें घटित होती रहती हैं, उसी प्रकार की एक घटना के रूप में मैंने इस क्षमता को भी प्राप्त किया था। 
एक बार बचपन में अपने चाचा के साथ मैं नदी के किनारे -किनारे टहल रहा था; मैंने अपने चाचा से अचानक कहा -" अभी मैं इस नदी में एक पत्थर फेंकूँगा, और आप देखेंगे कि पानी के भीतर से एक ट्राउट (विशेष किस्म की मछली) बाहर निकलेगी । " और ठीक वैसा ही हुआ भी था! यह देखकर चाचा तो भयभीत और भौंचक्का हो गए, और चिल्ला पड़े -"बडे रेट्रो सेटान "! वे काफी पढ़े लिखे थे इसलिये यह वाक्य उन्होंने लैटिन भाषा में कहे थे। ..... जब मैं पेरिस में था तब मैंने अपनी माँ की मृत्यु को देखा था। मैंने नीले आकाश में देखा कि सफ़ेद बादलों के कई अद्भुत जीव तैर रहे हैं, आकाश संगीत और प्रकाशमय हो रहा है। और उन मुखाकृतियों में से एक मुखाकृती बिल्कुल मेरी माँ जैसी है, जो मुझे असीम प्रेम के साथ निहार रही है ! और जैसे ही वह दृश्य गायब हुआ ....मैं समझ गया कि मेरी माँ की मृत्यु हो गयी है।

पत्रकार: श्री टेस्ला, नेता का सातवाँ समायोजन क्या है?

टेस्ला : दी सेवंथ एडजस्टमेंट : दी नॉलेज ऑफ़ हाउ द मेन्टल एंड वाइटल एनर्जी ट्रांसफॉर्म इन्टु व्हाट वी वांट, एंड अचीव कण्ट्रोल ओवर आल फीलिंग्स. हिन्दूज कॉल इट कुंडलिनी योग. किसी नेता से हमलोग अपेक्षा रखते हैं कि उसे अपनी समस्त प्रकार की भावनाओं को नियंत्रण में रखना चाहिये, अतः उसके लिये यह ज्ञान होना अनिवार्य है कि वह अपनी मानसिक शक्ति और प्राण-ऊर्जा को ओजस में कैसे रूपान्तरित कर सकता है? इसी को हिन्दू लोग कुलकुण्डलिनी योग कहते हैं। इस ज्ञान को वर्षों की साधना से सीखा जा सकता है, या किसी-किसी को जन्मजात रूप से भी प्राप्त रहता है। उन यौगिक शक्तियों में से अधिकांश मुझे जन्मजात रूप से प्राप्त थीं। वे शक्तियाँ ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक व्यापक यौन ऊर्जा ( sexual energy) के साथ अत्यंत सूक्ष्म रूप से जुड़ी हुई हैं। " दी वूमन इज द बिगेस्ट थीफ़ ऑफ़ दैट एनर्जी ऐंड दस दी स्पिरिचुअल पॉवर "  पत्नी या प्रेमिका (कामिनी-कांचन लस्ट ऐंड लूकर) उस ऊर्जा की-और इस प्रकार आध्यात्मिक शक्तियों की भी सबसे बड़ी चोर हैं! मैं इस बात को सदा से जानता था, और मुझे इस विषय बचपन से ही सतर्क कर दिया गया था।  " ऑफ़ माइसेल्फ इ क्रिएटेड व्हाट आइ वांटेड: अ थॉटफुल ऐंड स्पिरिचुअल मशीन." अतः जैसा मैं चाहता था, निरन्तर विवेक-प्रयोग करते हुए मैंने स्वयं को ही एक विवेकशील और आध्यात्मिक मशीन के रूप में ढाल लिया था! 

पत्रकार: और श्री टेस्ला,वह नौवाँ समायोजन क्या है ?

टेस्ला : " वास्तव में हमलोग कौन हैं, और इस धरती पर क्यों आविर्भूत हुए हैं " --इस बात को हम कभी न भूल पायें; इसके लिए जो कुछ करना हो वह सब किसी दिन कर लो, या सम्भव हो तो इसी क्षण कर लो! जो असाधारण मनुष्य होकर भी - बीमारी,वंचना (privation) के साथ संघर्ष कर रहे हैं, या अपनी जिस मूढ़ता (अज्ञानता), ग़लतफ़हमी (मिथ्याबोध misunderstanding), के कारण समाज उनको चोट पहुँचाता रहता है, अत्याचार और उत्पीड़न तथा अन्य समस्याओं से यह देश जिस कीड़ों -मोकोड़ों से भरे दलदल में डूबा हुआ है, वे जब तक अपना कार्य समाप्त नहीं कर लेते, वे एक अनजाने लावारिस के रूप में पीछे छूट जाते हैं। इस धरती पर कई ऐसे ही कई पथभ्रष्ट पैगम्बर आज भी हैं ! 

पत्रकार: दसवाँ अनुकूलन क्या है?

टेस्ला : यह सबसे महत्वपूर्ण है। ही (टेस्ला) प्लेड दी होल ऑफ़ हिज लाइफ ऐंड एन्जॉयड इट। तुम इस बात को लिख सकते हो कि टेस्ला ने अपने जीवन-खेल को पूरी तरह से खेला है, और इसका भरपूर आनन्द उठाया है।   

पत्रकार: श्री टेस्ला! क्या आप अपने अविष्कारों और कार्यों के विषय में कह रहे है ? क्या वह सब एक खेल है?

टेस्ला : हाँ, मेरे प्यारे बच्चे। आइ हैव सो लव्ड टु प्ले विथ इलेक्ट्रिसिटी! बिजली के साथ खेलना - मेरा बहुत प्यारा खेल है। मैं जब उस ग्रीक नायक प्रोमिथियस का नाम सुनता हूँ, जिसने स्वर्ग से अग्नि चुरा कर मानवों को थी तो मैं सदा नतमस्तक हो जाता हूँ। [ यह बड़ी त्रासदायक कहानी है - जब देवताओं के राजा ज़ीयस को यह बात पता चली तो उन्होंने सज़ा के तौर पर प्रोमिथियस को ताउम्र एक चट्टान के साथ बांधकर रख दिया जहां रोज़ एक परभक्षी ईगल आकर उसका कलेजा खाता था, लेकिन वह दोबारा उग जाता था ;और अगले दिन आकर गिद्ध उसे दोबारा खाता था। अंत में प्रोमिथियस को हेराकल्स (हरक्यूलीस) ने इस बंधन से मुक्ति दिलाई। ] 
डिड  ज़ीयस डिड नॉट हैव एनफ लाइटनिंग एंड थंडर, एंड वाज डैमेज्ड फॉर वन फर्वर? क्या देवताओं के राजा ज़ीयस के पास पर्याप्त बिजली (lightning) और वज्र (thunder) नहीं थे -जो केवल एक व्यक्ति के जोशीले कार्य से इतना क्षतिग्रस्त हो गया? बिजली गिरने के साथ कुछ भ्रान्तियाँ जुड़ी हुई हैं.....वास्तव में बिजलीयों का गिरना वह सुन्दर खिलौना है जिसे कोई भी प्राप्त कर सकता है। अपनी पाठ्य-पुस्तकों में लिखित उस बात को मत भूलना कि - "निकोला टेस्ला वाज दी फर्स्ट मैन हु डिस्कवर्ड लाइटनिंग," निकोला टेस्ला ही वह पहला आदमी है जिसने बिजली (lightning) की खोज की थी।"  

पत्रकार: श्री टेस्ला, आप तो सिर्फ पैगम्बरों (मानव-जाति के मार्दर्शक नेताओं) के पृथ्वी पर आविर्भूत होने के लिए उनके अनुकूलन के विषय में बातें कर रहे हैं। 

टेस्ला : क्या मैं बोल रहा हूँ ? यह बिल्कुल वैसा लगता है। तुम इसे इस प्रकार लिख सकते हो: टेस्ला ने स्वर्ग का राजा इन्द्र, ज़ीयस और पेरॉन के विशेषाधिकारों को स्वयं हथिया लेने की जुर्रत या दुस्साहस की थी! काले रंग की इवनिंग सूट में इन देवताओं में से किसी एक (राजा इन्द्र) की कल्पना करो; जो सफेद सूती दस्ताने और गोल्फ कैप पहने हुए न्यूयॉर्क शहर के अभिजात्य वर्ग के लिये लाइटनिंग, अग्नि और भूकम्प का निर्माण कर रहा है!

पत्रकार: हमारे अख़बार के पाठक इसके हास्य कॉलम से प्रेम करते हैं। किन्तु आप यह कहकर मुझे भ्रमित कर रहे हैं कि आपके द्वारा किये गए समस्त आविष्कार और नए उपकरण -जिससे मानवता को अपार लाभ पहुँचा है; आपके लिए केवल एक खेल हैं?  कई लोग इसे पढ़कर अपनी भवें टेढ़ी कर सकते हैं।  

टेस्ला : प्रिय भाई श्री स्मिथ, दिक्कत तो यही है कि लोग इस विषय में जरूरत से ज्यादा गंभीर हो गए हैं । यदि वे इतने ज्यादा गम्भीर नहीं होते, तो वे अधिक खुश रहते और अधिक आयु तक जीवित भी रहते। एक चीनी कहावत है कि -'सीरियसनेस रेडुसेज लाइफ' या " गम्भीरता की पराकाष्ठा आयु को घटा देती है!" ताई पे जब एक सराय (Inn) में घुस रहा था तो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था -मानो वह किसी शाही महल में प्रवेश कर रहा हो ! किन्तु यह खबर पढ़ कर किसी पाठक ने नाक-भौं नहीं सिकोड़ी होगी;अतः हमें उन बातों पर ही पुनः ध्यान केन्द्रित रखना चाहिये जिन्हें वे महत्वपूर्ण समझते हैं। 

पत्रकार: हमारे पाठक यह सुनना पसन्द करेंगे कि आपका अपना जीवन दर्शन क्या है ?  

टेस्ला : इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिये कि जीवन एक ताल (rhythm या लय) है।  मैं जीवन के उस लय को महसूस करता हूँ,और बड़े प्रेम से उसका लालन-पालन करता हूँ । इसीलिये जीवन भी मेरा आभार मानता है, तथा जो भी ज्ञान मेरे पास है, वह सब मुझे जीवन से मिला है। जो कुछ भी अस्तित्व में है वह सब- मनुष्य और ग्रह-तारे,अमीबा और सूर्य, हृदय और अनन्त ब्रह्माण्डों का संचालन परस्पर एक गहरे और अनोखे सम्बन्ध में बन्धे हैं। ये सम्बन्ध अटूट हैं -किन्तु इन्हें वश में लाया जा सकता है,और जगत में एक अनुकूल, नया और विभिन्न प्रकार का सम्बन्ध बनाया जा सकता है,जो पुराने सम्बन्धों का उल्लंघन भी नहीं करता। ज्ञान हृदय-आकाश से आता है, और इसे व्यक्त करने की सर्वाधिक पूर्ण उपकरण है - हमारी दृष्टि। हमारी दो ऑंखें हैं - एक भौतिक (earthly) और दूसरी आध्यात्मिक ! (दृष्टिं ज्ञानमयी कृत्वा पश्येत ब्रह्ममय जगत) मेरी सलाह है तो यह होगी कि दोनों प्रकार की ऑंखें एक बन जायें। अपनी सभी अभिव्यक्तियों में यह ब्रह्माण्ड, एक विचारशील प्राणी के रूप में जीवन्त है। पत्थर भी किसी पौधा, पशु या मनुष्य के जैसा ही एक चेतन (sentient) और विचारशील प्राणी है ! जो सितारा चमक रहा है, वह हमें निहारने को प्रेरित करता है, और यदि हम बहुत बड़े खुदगर्ज न हों, तो हमलोग उसकी भाषा और सन्देश को समझ सकते हैं। ब्रह्माण्ड की सांसे, आँख और कान जिन नियमों का पालन करते हैं, मनुष्य की श्वासों, उसकी आँखों और कानों को भी ठीक उन्हीं नियमों का पालन करना चाहिये जिन्हें ।  

पत्रकार: आप जब इस प्रकार की बातें करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे मैं बौद्ध ग्रंथों, शब्दों या ताओवादी प्रवचन सुन रहा होंऊ।

टेस्ला : ठीक यही बात है! इसका मतलब यह हुआ कि सामान्य ज्ञान (इन्द्रियों का इन्फॉर्मेशन) और सत्य का ज्ञान (अतीन्द्रिय ज्ञान =प्रज्ञा ?)-यह दोनों प्रकार का ज्ञान मानवजाति के पास सदैव से रहा है। मेरे अनुभव और एहसास के अनुसार ब्रह्माण्ड में केवल एक पदार्थ और एक परम् ऊर्जा है; जो अपने को असंख्य जीवन्त नाम-रूपों में अभिव्यक्त करती है। और सबसे अच्छी बात यह है कि एक के रहस्यमयी प्रकृति का अविष्कार दूसरे के रहस्य से भी पर्दा उठा देता है। वे हमारे चारों तरफ विद्यमान हैं, आपसे छुप नहीं सकते, किन्तु हम स्वयं उनके लिए अंधे और बहरे हो जाते हैं। यदि हम भावनात्मक रूप से स्वयं को उनके साथ जुड़ा हुआ महसूस करें, तो वे खुद चलकर हमारे पास आ जाते हैं। सेव तो बहुत सारे होते हैं, किन्तु न्यूटन कोई एक ही होता है। उन्होंने केवल एक ही सेव को चाहा था जो उनके सामने गिर पड़ा था। 

पत्रकार: प्रिय श्री टेस्ला, मुझे इस साक्षात्कार की शुरुआत में ही जिस सवाल को पूछ लेना चाहिये था, वह अभी पूछता हूँ  -आपके लिये बिजली क्या थी ? 'व्हाट वाज इलेक्ट्रिसिटी फॉर यू, डिअर मी. टेस्ला? 

टेस्ला: सब कुछ बिजली (काली ?) है। " फर्स्ट वाज दी लाइट, दी इंडलेस सोर्स" पहले ऊर्जा के अनंत स्रोत के रूप में प्रकाश था (या ज्योति थी), जिससे स्थूल भूत पदार्थ ब्रह्माण्ड, पृथ्वी और इसपर सभी प्रकार का जीवन उतपन्न हुआ। 'ब्लैक इज द ट्रू फेस ऑफ़ लाइट' उस ज्योति का वास्तविक चेहरा काला (काली) है! केवल हमलोग यह देख नहीं पाते हैं,(जब तक वह स्वयं अपने मुख पर टॉर्च न मारे)। यह मनुष्यों तथा अन्य प्राणियों पर उनकी उल्लेखनीय कृपा है। इसका एक कण प्रकाश को धारण करता है, कोई ताप, कोई परमाणु विकिरण, कोई रासायनिक, यांत्रिक और एक अज्ञात ऊर्जा को धारण करता है। 
" इट हैज दी पॉवर टु रन दी अर्थ विथ इट्स ऑर्बिट."-इसके पास पृथ्वी को इसकी कक्षा में संचालित करने की शक्ति है। यही (काली) सच्ची आर्किमिडीज़ लीवर है जिसके विषय में उन्होंने कहा था - "मुझे यदि खड़े होने के लिये वह जगह मिल जाए तो मैं (लीवर की मदद से) पृथ्वी को हिला सकता हूँ।"

पत्रकार- मी.टेस्ला, यू आर टू बायस्ड टुवर्ड्स इलेक्ट्रिसिटी. श्री टेस्ला, आप बिजली (शक्ति) के प्रति जरूरत से ज्यादा पक्षपाती नहीं हो रहे हैं?  

टेस्ला: मैं 'इलेक्ट्रिसिटी' हूँ । या, अगर आप चाहें तो सोच सकते हैं कि -'आइ ऐम दी इलेक्ट्रिसिटी इन दी ह्यूमन फॉर्म.' मैं मनुष्य के रूप में बिजली (काली)  हूं। " यू आर इलेक्ट्रिसिटी; टू मी. स्मिथ, बट यू डू नॉट रियलाइज इट"  - श्री स्मिथ आप भी बिजली हैं; लेकिन आप को इसकी अनुभूति नहीं है।[प्रज्ञानं ब्रह्मा/prajnaanam brahmaa (definition of Truth = 'consciousness is Brahman'). तत्त्वं असी/tat tvam asii (instruction/advice of the guru to the shishya = 'that thou art')

पत्रकार: क्या एक लाख वोल्ट की इलेक्ट्रिसिटी को अपने शरीर में प्रवाहित करना चाहें, तो क्या आप उसकी अनुमति देने में विफल नहीं होंगे ?  

 टेस्ला : कल्पना करो उस बागवान (माली) की जिस पर जिस पर जड़ी-बूटियों ने हमला कर दिया हो। ऐसा सोचना वास्तव में पागलपन होगा। मनुष्य का शरीर और मस्तिष्क ऊर्जा की विशाल राशि से बना हुआ है; मेरे भीतर वह ऊर्जा अधिकांशतः विद्युत् ऊर्जा है। वह ऊर्जा प्रत्येक प्राणी में अलग अलग मात्रा में है, और मानवीय 'अहं' -या मैंपन (जीवात्मा) है। इतर जीवों के लिए सार रूप से -पौधे की 'आत्मा' ही खनिज पदार्थों और पशुओं की 'आत्मा' है। "ब्रेन फंक्शन ऐंड डेथ इज मैनिफेस्टेड इन लाइट."---मस्तिष्क की क्रियायें और मृत्यु प्रकाश में अभिव्यक्त होती हैं। युवावस्था में मेरी ऑंखें काली थीं, अब नीली हैं, और जैसे जैसे समय बीतता जाता है, तनाव से मस्तिष्क मजबूततर होता जाता है, वे सफ़ेद रंग के निकट होती जा रही हैं। सफ़ेद रंग स्वर्ग का रंग है। एक दिन सुबह में एक सफेद कबूतर मेरी खिड़की से कमरे में उतर आया, जिसे मैंने दाना खिलाया। वह मानो मुझसे एक शब्द में कहना चाह रही थी कि वह मरने वाली है। उसकी आँखों से मानो हल्के जेट विमान बाहर निकल रहे थे। अब तक किसी प्राणी की आँखों में इतनी रौशनी नहीं देखी थी, जितनी उस कबूतर के आँखों में थी। 

पत्रकार: आपकी प्रयोगशाला में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि जब आप क्रोधित हो जाते हैं, या कोई जोखिम का काम करते हैं तब आँखों से बिजली, आग और चमक निकलने लगते हैं ? 

टेस्ला : यह एक अतीन्द्रिय प्रवाह (psychic discharge) या सावधान हो जाने की चेतावनी है। प्रकाश हर समय मेरे पक्ष में था। जानते हो मैंने " रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड " (घूर्णनशील चुम्बकीय क्षेत्र) और "इंडक्शन मोटर" का अविष्कार कैसे किया था -जिसने मुझे केवल २६ वर्ष के उम्र में ही प्रसिद्द बना दिया था? एक दिन बुडापेस्ट में गर्मी की एक शाम को मैं अपने मित्र के साथ सिगेटइजेम सनसेट (Sigetijem sunset) सूर्यास्त का दर्शन कर रहा था। आग के हजारों ज्वलन्त रंग, हजारों अग्नि स्फुलिंगों के रूप में सूर्य के चारो ओर घूम रहे थे। मुझे गेटे की रचना फ़ाउस्ट का स्मरण हो आया, और उसके पदों को दुहराने लगा, और तब मानो मैंने कोहरे के बीच स्पिनिंग मैग्नेटिक फिल्ड और इंडक्शन मोटर को देखा था। किन्तु उन्हें बिल्कुल स्पष्ट रूप से देखा था -मानो धूप में देखा हो। 

पत्रकार: होटल सर्विस का कहना है कि बिजली कड़कते समय, आप स्वयं को कमरे में अलग कर लेते है और अपने आप से ही बातें करते रहते हैं? 

टेस्ला : नहीं, मैं बिजली और गर्जना के साथ बातें करता हूँ। 

पत्रकार: उनके साथ? श्री टेस्ला उनके साथ आप किस भाषा बातें करते हैं ?

टेस्ला : ज्यादातर अपनी मूल भाषा। इसमें शब्द और ध्वनियाँ हैं -विशेष रूप से कविता इसके लिए अधिक उपयुक्त है। 

पत्रकार: यदि आप इसकी व्याख्या कर सकें तो हमारी पत्रिका के पाठक आप के बहुत आभारी होंगे।  

टेस्ला : ऐसा नहीं है कि ध्वनि केवल गर्जना और बिजली में ही रहती है, बल्कि उसकी चमकार और रंग के परिवर्तन में भी होती है। किसी रंग को सुना भी जा सकता है ! शब्दों से भाषा बनती है, जिसका अर्थ होता है कि ये ध्वनि और रंग से उत्पन्न हुई है। आकाश में जितनी भी बिजली चमकती है, और गर्जना होती है वे सब अलग अलग होते हैं तथा उनके नाम भी होते हैं। उनमें से कुछ को मैं उन व्यक्तियों के नाम से बुलाता हूँ, जो मेरे जीवन में बहुत निकट थे, या उन व्यक्तियों के नाम से बुलाता हूँ जिनका मैं प्रशंसक रहा हूँ । मेरी माँ, बहन, मेरा भाई डैनियल , एक कवि ' जोवान जोवानोविक जेम्ज़' तथा सर्बियाई इतिहास में प्रसिद्ध अन्य लोग के नाम से आकाश में बिजली और गर्जना रहते हैं। 
तथा जो  बिजली और गर्जनायें सुखी धरती, जलते पेड़ों और गाँवों  में कीमती पानी की बौछार करते हुए पूरी रात रुकते नहीं, और भीड़-भाड़ के झड़प से हुए तमाम आग की जलती हुई निशानों को धो डालती हैं -उन्हें मैं पैगम्बर यशयाह, ऐज़िकल, लियोनार्डो द विंची, लुडविग वान बीथोवेन ( एक जर्मन संगीतकार), गोया, फैराडे, रुसी कवि पुश्किन आदि के नाम से पुकारता हूँ। ये कुछ ऐसी बिजलियाँ और गर्जनायें हैं जो वज्र के जैसे दीप्तिमान और सर्वाधिक शक्तिशाली महापुरुष हैं और मानव इतिहास में सदा चमचमाते रहेंगे कभी गायब नहीं हो सकते। वे पुनः वापस आ रहे हैं, और मैं हजारों के बीच उन्हें पहचान सकता हूँ।  

पत्रकार: क्या आप के लिए, विज्ञान और कविता एक ही वस्तु है ?

टेस्ला : ये दोनों किसी एक ही व्यक्ति की दो ऑंखें हैं। विलियम ब्लेक को यह सिखाया गया था कि यह ब्रह्माण्ड कल्पना से पैदा हुआ है, तथा इनकी मान्यता है कि जब तक पृथ्वी पर अंतिम व्यक्ति जीवित है -यह विश्व-ब्रह्माण्ड भी कायम रहने वाला है। यह ब्रह्माण्ड एक पहिये जैसा जैसा घूम रहा है, जिसमें खगोलशास्त्री ग्रहों और सभी आकाशगंगाओं को एकत्र कर सकते हैं। 'क्रिएटिव एनर्जी इडेन्टिकल टू दी लाइट एनर्जी'.यह सृजनात्मक ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा (ओजस) से अभिन्न है!

पत्रकार: क्या आपके लिये कल्पना जीवन से भी अधिक वास्तविक है?

टेस्ला : यह कल्पना ही है जो जीवन को जन्म देती है। मैंने अपनी शिक्षा के द्वारा सिंचित हूँ, और मैं अपने सपनों, भावनाओ, कल्पनाओं को नियंत्रित करना सीख लिया है। जब कभी मैंने अपने उत्साह को विकसित किया है, मैंने सदैव उसको पोषित किया है। अपना पूरा लम्बा जीवन मैंने परमानन्द (ecstasy) में जीया है। मेरी अबाध प्रसन्नता का स्रोत यही था। विगत वर्षों के कड़े परिश्रम को सहन करने में इस परमानन्द ने मेरी इतनी सहायता की है, जो पाँच जन्मों के लिए भी पर्याप्त है। काम करने के लिये रात सबसे अच्छा समय है, क्योंकि नक्षत्रीय प्रकाश और रात में करीबी नाता है। 

पत्रकार: यु सेड दैट "आइ वाज, लाइक एवरी बीइंग, दी लाइट". दिस फ्लैटर्स मी आपने कहा था कि आप प्रकाश (बिजली) हैं, जैसे हर कोई एक बिजली (अव्यक्त ब्रह्म) है; यह (महावाक्य) मुझे झूठी तारीफ़ जैसी प्रतीत तो होती है - किन्तु मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं इसे ठीक से समझ नहीं सका।

टेस्ला: श्री स्मिथ, तुन्हें इस बात को समझने की आवश्यकता क्यों होगी ? (यह महावाक्य है !) इस पर विश्वास करना ही यथेष्ट है। (तुम जैसा सोचोगे वही बन जाओगे) हर वस्तु प्रकाश (ब्रह्म) है ! जिस प्रकार हम महान प्रकाश पुंज के स्रोत के रूप में हमलोग सूर्य को देखते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक किरण (चमक) होती है, और उसकी यह चमक ही उस देश का भाग्य होता है। और याद रखना -जिसका भी जन्म हुआ है, एक दिन अवश्य मरेगा ! [वे कहाँ जाते हैं ?] वे प्रकाश (ओजस?) के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं, और इस रूप में अब भी उनका अस्तित्व है। सम्पूर्ण रहस्य इस सच्चाई में निहित है कि -"लाइट पार्टिकल्स रिस्टोर देयर ओरिजिनल स्टेट"- प्रकाश के कण पुनः अपने मूल स्वरूप को प्राप्त हो जाते हैं। 

पत्रकार: क्या यही पुनरुज्जीवन (resurrection) है!

टेस्ला: मैं इसे "रिटर्न टू दी प्रीवियस एनर्जी"- पूर्वर्ती ऊर्जा में लौट जाना कहना अधिक पसन्द करता हूँ। इस रहस्य को ईसा मसीह और कई अन्य लोग जानते थे। मानवीय ऊर्जा को कैसे संरक्षित किया जाय -मैं इसी विषय पर खोज कर रहा हूँ। किसी किसी में यह प्रकाश की आकृति (प्रभावलय) सीधे स्वर्गीय प्रकाश के रूप में होती है। मैं अपने लाभ के लिए इसकी खोज नहीं कर रहा, 'बल्कि बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' की भावना से कर रहा हूँ ! मैं यह विश्वास करता हूँ कि मेरे आविष्कार लोगो के जीवन आसान और अधिक सहनीय बनाते हैं, तथा उन्हें आध्यात्मिकता और नैतिकता के मार्ग से जोड़ देते हैं। 

पत्रकार: क्या आपको लगता है कि समय को समाप्त किया जा सकता है?

टेस्ला : पूर्ण रूप से नहीं, क्योंकि ऊर्जा की पहली विशेषता यही है कि वह रूपांतरित हो जाती है। ताओवादियों के अनुसार जैसे बादल निरन्तर परिवर्तित होते रहते हैं, उसी प्रकार यह ऊर्जा भी अनवरत परिवर्तित होती रहती है। किन्तु इस सच्चाई को प्रमाणित करना सम्भव है कि मनुष्य सांसारिक जीवन जीने के बाद भी अपनी चेतना को सुरक्षित रखता है। ब्रह्मांड के हर कोने में, प्राण-ऊर्जा मौजूद हैं;उनमे से एक प्राणऊर्जा है- अमरत्व जिसका मूल मनुष्य से बाहर (परमात्मा) है, और जो उसकी प्रतीक्षा कर रहा है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आध्यात्मिक है; और हम लोग उस रूप में केवल आधे हैं। ब्रह्माण्ड हमारी तुलना में अधिक नैतिक है,क्योंकि हमलोग उसकी मूल प्रकृति को नहीं जानते तथा अपने जीवन को कैसे उसके साथ सुसामंज्स्य में रखा जा सकता उसकी विद्या नहीं जानते हैं। जो सवाल मुझे निरन्तर परेशान किये रहते हैं, और मेरी रातों को आग में बदल देते हैं, उसका उत्तर खोजने के लिए शायद विज्ञान ही सबसे सुविधाजनक साधन है, किन्तु मैं वैज्ञानिक नहीं हूँ !

पत्रकार: जड़ वस्तुएं (पंचभूत) क्या हैं ?

टेस्ला : तुम्हारी ऑंखें किस ज्योति से चमक रही हैं ? ... मैं जो जानना चाहता था: वह यह कि जब सूर्य के परिपथ से तारा टूट कर गिरता है, तो उस तारे का क्या होता है ? सितारे धूल की तरह या बीज की तरह इस दुनिया में या किसी दूसरी दुनिया में गिरते हैं। यह सूर्य ही हमारे मन के रूप में, कई प्राणियों के जीवन के रूप में, बिखरा हुआ है जो पुनः एक नई बिजली के रूप में पुनर्जन्म लेगा, या ब्रह्माण्डीय हवा के रूप में अनंत तक बिखर जायेगा। मैं ब्रह्माण्डीय संरचना में यह बात अनिवार्य रूप में शामिल है। बात यह है कि इन ग्रहों में से कोई ग्रह हो, या इन सूर्यों में कोई एक सूर्य हो, या कोई तिनका हो - संरक्षित रहते हैं !

पत्रकार: लेकिन, श्री टेस्ला, क्या आप यह महसूस करते हैं, इस बात को दुनिया के संविधान में शामिल करना अनिवार्य है ?

टेस्ला :जब किसी व्यक्ति का दिमाग हिल जाता है (आत्मसाक्षात्कार से ?), तब उसका सर्वोच्च लक्ष्य यह अवश्य होना चाहिये कि नक्षत्रों का आखेट करे, उन्हें पकड़ने के लिए दौड़े, उसे यह समझना चाहिए की उसे जो (दुबारा जन्म मिला है) वह इसी कार्य के लिए, मिला है और वह बच जायेगा। अन्ततः सितारे सितारों को पकड़ने में समर्थ बन जायेगा ।  

पत्रकार: और तब उसके बाद क्या होगा?  

टेस्ला : तब सृष्टिकर्ता (ब्रह्माजी) हँसते हुए कहेंगे - " कोई सितारा  टूट कर केवल इसी लिए गिरता है, ताकि तुम उसका पीछा करो और दौड़ कर उसे पकड़ लो !" 

पत्रकार: क्या यह उस ब्रह्माण्डीय दर्द के विपरीत नहीं है, जिसका उल्लेख आप अपने निबन्धों में अक्सर किया करते हैं ? और यह ब्रह्माण्डीय-पीड़ा क्या होती है ? 

टेस्ला : नहीं, क्योंकि हम पृथ्वी पर हैं ... और यह एक वैसी बीमारी (भवरोग) है, हममें से अधिकांश लोगों को इस रोग का पता ही नहीं है। इसीलिए मानव-जीवन, कई अन्य प्रकार के रोगों -दुःखकष्ट, बुराइयाँ, पीड़ा, युद्ध, प्रताड़ना आदि से ग्रस्त होकर बेतुका और भयंकर लगने लगता है। इस रोग को पूरीतरह से तो ठीक नहीं किया जा सकता, किन्तु आत्म-जागृति इसको कम जटिल और कम कष्टप्रद अवश्य बना सकती है।   
जब कभी मेरे किसी करीब और प्रिय लोगों में किसी एक को भी चोट पहुँचती थी, तो मैं शारीरिक दर्द महसूस करता था। इसका कारण यह है हमारे शरीर इसी तरह की सामग्री से बने हैं,और एक ही आत्मा हम सबों में विद्यमान हैं । जब हमलोग कभी कभी अचानक एक अचिंतनीय उदासी से अभिभूत हो जाते हैं, तो उसका तात्पर्य यही होता है कि इस पृथ्वी पर अथवा और कहीं इस ग्रह के दूसरे गोलार्ध में किसी शिशु या किसी उदार-हृदय मनुष्य (हर्टहोल मैन) की मृत्यु हुई है।   
किसी किसी अवधि में यह पूरा ब्रह्मांड स्वयं से और हमलोगों से रुग्ण हो जाता है। किसी  स्टार के लापता होने और धूमकेतुओं की उपस्थिति हमें उससे अधिक प्रभावित करती है, जिसकी हम कल्पना करते हैं।   
जब हमारी भावनाओं और विचारों को फूल मौन में परिणत होकर और भी अधिक सुंदर खुशबू फैलायेंगे, तब इस पृथ्वी पर प्राणियों के बीच परस्पर संबंध और अधिक सद्भावनापूर्ण तथा प्रगाढ़ होंगे। सुखी होना चाहते हों तो इन सत्यों को हमें जानना होगा। इसका उपाय हमारे हृदय में ही है, तथा उन पशुओं में भी समान रूप से है, जिन्हें हम लोग जगत कहते हैं। 
--------------------------------------

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें