उर्दू के प्रसिद्द शायर जलालुद्दीन रूमी का एक प्रसिद्द नज्म है -
'आदमी की तरक़्क़ी'
(मनुष्य का क्रमविकास)
१.बेजान चीज़ों से मर गया, पौधा बन गया।
फिर पौधों से मर गया, हैवान बन गया।
हैवानों से मर गया और 'आदमी ' हो गया.
डरूँ क्यों, कि कब मर कर कम हो गया?"
डरूँ क्यों, कि कब। ......
अगली दफ़े आदमियों के बीच से मर जाऊँ;
ताकि फ़रिश्तों के बीच पर व पंख उगाऊँ।
और फ़रिश्तों में से भी चाहिये निकल जाना;
क्युंके सिवा 'उस' के हर शै को है फ़ना हो जाना।
एक बार फिर फ़रिश्तों से क़ुरबां हो जाऊँगा।
फिर जो सोच में नहीं आता, मैं 'वो' (ब्रह्म) हो जाऊँगा !!
इसका तात्पर्य यह है कि खनिज, उद्भिज, पौधा, स्थावर-जंगम, पशु आदि योनियों से उन्नत होते हुए अन्त में यह मनुष्य का शरीर प्राप्त हुआ है। किन्तु यही अन्त नहीं है, शरीर का क्रम-विकास (आत्मा का नहीं) अब भी चलना चाहिये। मनुष्य को अपना वर्णाश्रम धर्म का पालन करते हुए (अर्थ-काम-मोक्ष के मार्ग पर चलते हुए) मनुष्य को देवता (ब्रह्म) में विकसित हो जाना चाहिये। देवता बन जाने के लिये स्वर्ग -नरक जाने की आवश्यकता नहीं है। Heart whole Man, man with capital 'M', d-hypnotized, भ्रममुक्त मनुष्य, (100 में 85 खा जाने वाला PM नहीं) शतप्रतिशत निःस्वार्थपर मनुष्य अथवा 'देवता जैसा मनुष्य' बनकर भी धरती पर ही रहा जाता है। यह कैसे सम्भव होता है ? यह सम्भव होता है - वैराग्य सहित, 'श्रेय को ग्रहण करने, और प्रेय का त्याग करने' का अभ्यास करने से। मन (awareness-चेतना) की अनन्त शक्ति को अपने वश में ले आने से सबकुछ सम्भव हो जाता है।
स्वामी विवेकानन्द का युवाओं के प्रति आह्वान था- Be and Make ! वास्तव में यह वेदान्त के चार संस्कृत महावाक्यों जैसा अंग्रेजी का एक महावाक्य है ! इस महावाक्य में स्वामी जी ने हमें सर्वप्रथम 'Be'- होने का अर्थात 'पूर्ण हृदयवान मनुष्य' (Heart whole Man-या शतप्रतिशत निःस्वार्थपर मनुष्य) बनने का आदेश दिया है, अगले ही शब्द में वैसा मनुष्य बनने का उपाय ~ 'Make ' बताते हुए कहते हैं- 'अपने भीतर ब्रह्म-भाव को जाग्रत रखने का सबसे सरल तरीका है, दूसरों को इस कार्य में ~ सहायता करना।' [ अर्थात " श्रेय को ग्रहण करने और प्रेय का त्याग" करने के लिए अपने निकट रहने वालों प्रोत्साहित करते रहना ] तुम स्वयं यथार्थ मनुष्य बनने और दूसरों को मनुष्य बनाने के प्रयत्न में आगे बढ़ो! आगे बढ़ो! 'चरैवेति चरैवेति !' क्योंकि 'पूर्णहृदयवान सच्चा मनुष्य' बन जाना यही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है।
[साभार-मनःसंयोग-4 [ 29-12 -2018 : 'सरिसा आश्रम कैम्प' : The Best Class of Nda] / http://vivek-anjan.blogspot.com/2019/03/4-29-12-2018-best-class-of-nda.html/ रविवार, 3 मार्च 2019]
============